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सोमवार, 10 अगस्त 2026

छोटूराम अथवा यूनियनिस्ट पार्टी

#JaiYoddhey

यूनियनिस्ट जैक बनाम भगवा ध्वज !

एक दो खास जानकारी मैं अपने यूनियनिस्ट मिशन के यौद्धेय साथियों के साथ शेयर करना चाहता हूँ ,जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है, यहां तक कि सर छोटूराम अथवा यूनियनिस्ट पार्टी पर किताबें लिखने वाले भी यह जानकारी नहीं रखते कि आखिर सर छोटूराम साब की पार्टी का झंडा कौन सा था और उनकी पार्टी किस सिम्बल पर इलेक्शन लड़ती थी।

यहां इस पोस्ट में जो उगते सूरज का झंडा है  ,यह झंडा ही  यूनियनिस्ट पार्टी का झंडा हुआ करता था ।
गौर करें कि इस झंडे में  लाल, सफेद और नीला, तीन रंग हैं।

दूसरी तरफ जो दूसरा झंडा इसी पोस्ट में सलंग्न है, वह ब्रिटेन का झंडा यूनियन जैक है, इस यूनियन जैक में भी तीन ही रंग हैं- लाल, सफेद और नीला।

यूनियन जैक में और यूनियनिस्ट पार्टी के झंडे के रंगों में समानता कोई संयोग मात्र नहीं है, बल्कि जानबूझ कर , विचारविमर्श करके ही सर छोटूराम जी की पार्टी के झंडे में ये तीन रंग रखे गए थे, जिसका कारण था कि हम यूनियनिस्ट अंग्रेजी हुकुमत में गुलाम नहीं, बल्कि सम्मानजनक पार्टनर थे। अतः यह रंगों का एक जैसा होना इस पार्टनरशिप पर मुहर थी।

मैं यूनियनिस्ट पार्टी के झंडे को ब्रिटेन के यूनियन जैक की तर्ज पर यूनियनिस्ट जैक कहता हूं। 

भविष्य में हमारे इस महान यूनियनिस्ट जैक की सबसे बड़ी टक्कर ,संवैधानिक तरीके अपनाते हुए, भगवा ध्वज से होनी है, जिसकी तैयारी हम कर रहे हैं ; यह हमारी सामूहिक मेहनत पर निर्भर करेगा कि कौन सा झंडा इस मुल्क में बुलंद होगा ।

दूसरी जानकारी यह है कि 1947 से पहले भारत के प्रोविन्सेस (राज्यों) में जो इलेक्शन हुआ करते थे, उन चुनावों में पार्टियां तो थी ,परंतु सिंबल नहीं होते थे। जैसे आजकल बीजेपी का चुनाव चिन्ह कमल का फूल है, कांग्रेस का पंजा है, बसपा का हाथी है ,इस तरह के सिंबल पर इलेक्शन उस जमाने में नहीं हुआ करते थे।

बल्कि, उस जमाने में सिंबल की बजाय पोलिटिकल पार्टीज को कलर (रंग) दिए जाते थे, जैसे किसी पार्टी को हरा रंग मिल गया, किसी को गुलाबी मिल गया, किसी को सन्तरिया मिल गया, आदि।

आपको जानकर अच्छा लगेगा कि सर छोटूराम और सर फजले हुसैन साब की पार्टी का चुनावी रंग नीला था ,जिस पर हुई रायशुमारी से यौद्धेय, यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनाते थे।

बाद में यही नीला रंग भारत की पूरी बहुजन मूवमेंट का रंग बन गया। असल में साहब कांसीराम जी भी पंजाब से थे ,जो यूनियनिस्ट पार्टी के इतिहास और इस रंग से बखूबी वाकिफ थे।

आजकल जो कुछ नासमझ जाटों के लड़के ,मंडी फंडि की बहकाई में आकर मूलनिवासियों को अथवा दलित समाज के संघर्षशील लोगों को सोशल मीडिया पर "नीलटे नीलटे" कहकर मजाक उड़ाते हैं, तो इन हमारे बहके हुए जाट भाइयों को मैं बताना चाहता हूं कि इन नीलटों से पहले हम नीलटे बने थे।

दीनबंधु सर छोटूराम जी को तो यह नीला रंग इतना पसंद था कि उनकी रोहतक स्थित कोठी का रंग नीला ही है, जिसे नीली कोठी भी कहा जाता है। यह नीली कोठी 1928 में बनी थी और आज भी अपनी भव्यता के साथ खड़ी है।

आज इतना ही।

-मनोज दूहन

निवेदन - पोस्ट पसंद आये तो शेयर कर लेना ,जिससे सुसमाचार का प्रसार होवे।

शनिवार, 11 जुलाई 2020

विकास दुबे के सरेंडर ओर एनकाउंटर के 24 घण्टे के घटनाक्रम में देश के सबसे बड़े घोटाले की खबर दब गयी.

  • कल पंजाब नेशनल बैंक में 3 हजार 688 करोड़ रुपए के लोन की धोखाधड़ी सामने आयी यह धोखाधड़ी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटडे यानी DHFL ने अंजाम दी है. यह पूरा मामला नीरव मोदी के घोटाले से कही बड़ा है ........कुल 85 हजार करोड़ रुपये बैंको ओर अन्य वित्तीय संस्थानों का DHFl ने मार्केट में फर्जी कंपनियों को बांट रखा है धीरे धीरे जब सभी बैंक ऐसी ही धोखाधड़ी की जब ओर रिपोर्ट करँगे तब इस घोटाले की गंभीरता पब्लिक को समझ मे आएगी 

ऐसा नही है कि यह आज पहली बार सामने आया है, अटल सरकार में पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने DHFl द्वारा की गयी धोखाधड़ी को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बैंकिंग स्कैम’ करार दिया था, 29 जनवरी 2019 को खोजी पत्रकारिता से जुड़ी वेबसाइट कोबरापोस्ट ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ‘द एनाटॉमी ऑफ इंडियाज बिगेस्ट फाइनेंशियल स्कैम’ नाम से अपनी रिपोर्ट पेश की थी 

कोबरापोस्ट ने अपने स्ट‍िंग में यह आरोप लगाया गया था कि DHFL ने कॉरपोरेट मंत्रालय को जरूरी जानकारी दिए बिना बड़े लोन मंजूर किए हैं. ओर ये संभवत: देश का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला हो सकता है

उस वक्त यशवंत सिन्हा ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल पर लगे 31,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग की थी कंपनी पर आरोप था कि उसने सरकारी बैंकों जैसे एसबीआइ और बैंक ऑफ बड़ौदा से कर्ज लेकर उसका इस्तेमाल दूसरे कार्यो के लिए किया। कंपनी के प्रमोटर वधावन परिवार ने व्यक्तिगत फायदों के लिए शेल कंपनियों का नेटवर्क बनाकर बड़े पैमाने पर फंड की हेराफेरी की है. इस पूरे खेल में करीब 31,000 करोड़ रुपये का घपला होने का आरोप है. यह भी आरोप लगाया गया कि इन हथकंडों से प्रमोटर्स ने अपनी निजी वैल्थ खड़ी की।

मुम्बई के PMC बैंक में भी जिसमे आज तक खताधारको को अपना जमा पैसा नही मिला है उसमे भी सबसे बड़ा लोन मूल रूप से DHFL ग्रुप से जुड़ी कम्पनी को ही दिए गए थे

यह बहुत बड़ा घोटाला है इसकी कड़ियां धीरे धीरे ही खुलेगी.



मंगलवार, 23 जून 2020

Fight the war where they aren't



लड़ो वहां, जहां दुश्मन न हो। सुन-जू, प्राचीन चाइना का बड़ा जनरल था और उसकी किताब "आर्ट ऑफ वार" एक क्लासिक मानी गयी है। इतनी क्लासिक कि उसके तौर-तरीके और कोट, दुनिया के बड़े बड़े डिफेंस कालेज में पढ़ाये जाते है। 

तो देखिए, चीन वहां कब्जा करता है जहां हम नही होते। ताजा हालात ये है कि आप जब गलवन घाटी में फौजे अड़ा रहे है, उसकी ताकत हजारो किमी दूर सिक्किम में जमा हो रही है।
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1965 में ऑपरेशन ज्रिबाल्टर शुरू हुआ। ये पाक की चाल थी, कश्मीर में फिर से कबायलियों को घुसाकर भारत के खिलाफ प्रायोजित विद्रोह की। पीछे से पाकी फ़ौज भी घुसी। जम्मू के इलाके हाथ से निकल गए। भारत की कश्मीर में पहुंच कट गई। भारत की गर्दन पाकिस्तान के हाथ मे थी। 

पाकिस्तान हमसे कश्मीर में लड़ रहा था। और हम.. उससे लड़ने गए लाहौर, where they aren't.  जो एक डिस्प्यूटेड टेरेटरी में एलओसी में झड़प का नाटक था, अंतरास्ट्रीय सीमा पार कर फुल फ्लेजेड युध्द में बदल दिया। इसकी उम्मीद न थी पाक को, तीन साल पहले चीन से मात खाया थका हारा भारत..  और ये मजाल। 

अब पाकिस्तान कश्मीर में आगे बढ़े या लाहौर और पिंडी बचाये। उसने युध्द विराम की याचना की। शास्त्री ने मान लिया। पाक ने कश्मीर खाली किया, हमने लाहौर छोड़ दिया। जीत हिंदुस्तान की मानी गयी। 

शास्त्री ने बयान तो नही दिए, मगर घर मे घुसकर मारने वाले अकेले पीएम वही थे। 
1967 तक शास्त्री नही रहे, नेहरू की बेटी आ गयी। चीन को गुमान था, बाप को पांच साल पहले हराया था। बेटी को तो यूं मसल देंगे। 

नाथूला खाली करने का आदेश दिया, कहा हमारी टेरेटरी है। भारत हटा नही, बाड़ लगानी शुरू कर दी। ये बड़ी हिमाकत थी। फ़ौज को धमकाने चीनी अफसर आया, तो धक्का मुक्की में उसका चश्मा टूट गया। 

वह गया, और बंकर से गोलियों की बरसात कर दी। खुले में बाड़ लगा रहे सैनिक मारे गए। चीनियों को उम्मीद थी की फ़्लैग मीटिंग होगी, भारत दया की भीख मांगेगा। 

मगर उन्हें आश्चर्य का ज्यादा वक्त नही मिला। 400 चीनी चींटीयों की तरह मारे गए - कैसे? इसलिए कि गोलियों से नहीं, गोलों से जवाब मिला। तोपें लगा दी भारत ने .. धूम धड़ाक, बूम !!! 

1962 में माह भर का युध्द हुआ था, कोई 1200 भारतीय फौजी शहीद हुए थे। यहां 3 दिन में उनके चार सौ मारे। 88 सैनिक भारत के भी शहीद हुए। यह आधिकारिक रेकॉर्ड में है कि उनकी लाशें चाइनीज टेरेटरी में पांच किमी अंदर से मिली। लड़कों ने घुसकर मारा था। बयान नही दिया था। 

चीन ने युध्द विराम मांगा, दिया गया। नाथूला तब से शांत है। पाक सीमा से हमेशा लाशें आती हैं। मगर चीन सीमा से उसके बाद कभी नही आई। 

2020 में जरूर आयी है। 
चीन का व्यवहार प्रिडिक्टेबल रहा है। वह हमारे कमजोर वक्त का इंतजार करता है, खाली पीक पर कब्जे करता है। वह हमसे वहां लड़ता है, जहां हम नही होते। जीत तभी है जब आप उससे वहां लड़ें, जहां वो नही है। वैसे लड़े जिसकी उसे उम्मीद नही है। ऐसा करने से पहले बयानबाजी न करें। 

तो बयान बन्द है। खुदा करे ये भय की चुप्पी नही, रणनीति की चुप्पी हो।

रविवार, 24 मई 2020

आर्य समाज और जाट

आर्यसमाज और जाट

  आर्यसमाज को लेकर वाद-विवाद चल रहा है तो हमे भी सच्चाई सामने लाने का प्रयास करना चाहिए।आर्यसमाज की स्थापना 1875 में मुम्बई में होती है और मुम्बई में इसका प्रचार-प्रसार करने के बजाय इसका कार्यालय तुरंत बाद लाहौर शिफ्ट हो जाता है!

आर्य समाज के बड़े प्रचारक-पदाधिकारी वर्ग विशेष के ही रहे है!संयुक्त पंजाब व बंटवारे के बाद भी वर्ग विशेष के अखबारों के मालिक ही इनके कर्ता-धर्ता रहे!

चौधरी छोटूराम के खिलाफ ये आर्य समाजी अखबारों के मालिक खूब जहर उगला करते थे!चौधरी छोटूराम ने आर्यसमाज द्वारा आहूत हैदराबाद आंदोलन से जाटों को दूर रहने को कहा!

चौधरी छोटूराम ने जो अखबार निकाला वो जाट गजट नाम से निकाला आर्य समाज गजट नाम से नहीं!जाट स्कूल,जाट कॉलेज,जाट धर्मशाला आदि बनवाये।कृषि उत्पाद मार्केटिंग बिल को लेकर असेंबली में चौधरी छोटूराम पर अभद्र टिप्पणी करने वाला आर्य समाजी था!

आर्य समाजियों का मोटा-मोटा योगदान देखा जाए तो सबसे पहला तो यही नज़र आता है कि ब्राह्मणवाद के खिलाफ जो समाज सुधार आंदोलन चला था उससे जाट सिक्खिज्म में न चला जाएं इसलिए थामना था!

पंडित मूलशंकर तिवारी उर्फ दयानंद सरस्वती ने कबीर को उटपटांग भाषा व तंबूरा लेकर घूमने वाला नीच जुलाहा कहा!संत दादू को तेली कहा!गुरु नानक को अज्ञानी कहा!संत रामदास के लिए तो जातुसूचक गाली तक का उपयोग किया था!जन्म के आधार पर वर्णव्यवस्था का विरोध करने वाला पंडित खुद इस तरह की भाषा क्यों लिख रहा था?

आर्य समाजी प्रचारकों,पदाधिकारियों व अखबारों के मालिकों के इस गठजोड़ बंटवारे के समय मारकाट में क्या भूमिका अदा की उस सच्चाई को भी सामने लाना चाहिए!पश्चिमी पंजाब में जाट-गुर्जर आदि तो मुसलमान ही बने हुए थे और इधर के जाटों को मुसलमानों से कोई खतरा था नहीं फिर इतनी हत्याएं किसने की व क्यों की?पाकिस्तान से भारत आने वाली आबादी किस वर्ग की थी?

भारत मे मुसलमानों की बस्तियां फूंकने के लिए माहौल बनाने वाले अखबारों के मालिक कौन थे,आर्य समाजियों के गुरुकुलों की कोई भूमिका थी या नहीं?हथियार सप्लायर कौन थे?असल मे आर्य समाजी जाटों की भूमिका उस समय क्या थी वो वर्तमान आर्यसमाजी जाटों को खोजनी चाहिए,पढ़नी चाहिए!चौधरी छोटूराम आर्यसमाजी होकर भी जाट ही थे और जब तक जिंदा थे तब तक कट्टरपंथी ताकतों को पंजाब में नहीं घुसने दिया था।

एक समय अखबार मालिक लाला जगत नारायण जिसकी आर्य समाज मे तूती बोलती थी उसने अखबारों के माध्यम से पंजाब में जो नफरत फैलाई थी और मुख्यमंत्री प्रतापसिंह कैरो चाचा छोटूराम की दुहाई देकर आर्य समाजी जाटों को समझा रहे थे तब आर्य समाजी जाट किस तरफ खड़े थे?जब पंजाब में जाट सिक्खों पर अत्याचार हो रहे थे तब आर्य समाजी जाट कहाँ थे?दिल्ली में सिक्खों का नसरसंहार हो रहा था तब आर्य समाजी जाट कहाँ थे?रोहतक-पानीपत से ट्रेनें-बसें भरकर दिल्ली में दंगा करने आने का जो आरोप लगा था उसकी वास्तविकता क्या थी?

मेरे एक मित्र है उन्होंने लिखा कि मेरे भतीजे ने सवाल किया कि आर्य समाजी कह रहे है कि दादा खेड़ा तो इस्लाम की कांसेप्ट है क्योंकि मूर्ति-तस्वीर नहीं होती!क्या आर्य समाज मूर्ति पूजा का विरोध करते-करते वापिस अपनी जड़ों पर लौट चुका है?

आज आर्य समाजी जाट ज्यादातर आरएसएस के सिपाही बने नजर आते है अर्थात आर्य समाजी जाट आरएसएस के लठैत बन चुके है तो इतिहास व वर्तमान पर सवाल तो खड़े होंगे ही!आर्य समाज का भी झंडा उठाये रखना है और आरएसएस की शाखा से भी कोर्स करना है!यह कौनसा ब्राह्मणवाद का विरोध हुआ भाई?

मोटा-मोटी इशारों में सवाल किए है।सभ्य संवाद का स्वागत है।कुतर्क व व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की कोशिशें हुई तो सत्यार्थ प्रकाश से लेकर तिवारी जी के जीवन की व वर्तमान में फुदक रहे है  सबका आईना सामने आ जायेगा।

प्रेमाराम सियाग

गुरुवार, 14 मई 2020

मोदी के झूठे वादे

ये भी बहुत सुना था...

2014 के सपने

1•मिनिमम गवर्मेंट मेक्समम गवर्नेंस
2•भ्र्ष्टाचार के खिलाफ जंग
3•काले धन की लिस्ट ओर वापसी=15लाख
4•महंगाई से मुकाबला
5•इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में जान फूंकने का वादा
6•घुसपैठ रोकने की गारंटी
7•भूमि अधिग्रहण कानून
8•राष्ट्रीय शिक्षा नीति
9•जन वितरण प्रणाली
10•2करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष
11•100स्मार्ट सिटी
12•बुलेट ट्रेन
13•मेक इन इंडिया

*बीजेपी का घोषणापत्र:2014*
1-स्वास्थ्य

बीजेपीः हर राज्य में AIIMS की स्थापना। राष्ट्रीय स्वास्थ्य गांरटी मिशन। आयुर्वेद और योग को प्रमोट करने के लिए निवेश किया जाएगा। नैशनल ई-हेल्थ अथॉरिटी बनेगी। इमर्जेंसी मेडिकल सर्विस 108 का दायरा बढ़ाया जाएगा। शहरों और कस्बों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन प्रोग्राम लाएंगे।

2-घर

बीजेपीः लो कॉस्ट हाउसिंग प्रोग्राम के जरिए 2022 तक हर परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराने का वादा किया गया है। 100 नए शहर बनाए जाएंगे

3- शिक्षा-रोजगार

बीजेपी- छात्रों को एजुकेशनल स्कॉलरशिप और अन्य सुविधाएं। शिक्षा पर जीडीपी का 6 पर्सेंट खर्च करेंगे। नैशनल ई-लाइब्रेरी बनाई जाएगी। यूजीसी को हायर एजुकेशन कमिशन के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। छात्रों के लिए नैशनल मल्टी स्किल मिशन।

4-गरीबों के लिए

बीजेपीः देश के 100 सबसे पिछड़े जिलों को दूसरे जिलों के बराबर लाने की कोशिश होगी। ग्रामीण गरीबों को कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों में शिक्षा और उद्यमिता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। छुआछूत को हर स्तर पर खत्म किया जाएगा और सिर पर मैला ढोने की प्रथा खत्म की जाएगी।

5-आर्थिक

बीजेपी: दाम स्थिर करने के लिए विशेष फंड। टैक्स सिस्टम में सुधार लाया जाएगा।

6-एफडीआई और जीएसटी

बीजेपीः जीएसटी पर राज्यों से बात करके लागू करेंगे। एफडीआई का स्वागत करेंगे, लेकिन घोषणा में रीटेल में एफडीआई का जिक्र नहीं

7-महिलाएं

बीजेपीः संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का कानून बनाया जाएगा। 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ' अभियान पूरे देश में चलाया जाएगा। महिलाओं के लिए समर्पित आईटीआई और मोबाइल बैंक खोले जाएंगे। हर जिले में महिला उद्यमियों के लिए एसएमई क्लस्टर खोले जाएंगे।

8-अल्पसंख्यकों के लिए

बीजेपीः बीजेपी के घोषणापत्र में कहा गया है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों की बड़ी आबादी आज भी गरीबी में जीवन गुजार रही है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खासकर अल्पसंख्यकों की बच्चियों को शिक्षा और नौकरी में बिना किसी भेदभाव के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए राष्ट्रीय मदरसा आधुनिकीकरण कार्यक्रम चलाया जाएगा। उर्दू को बढ़ावा दिया जाएगा।

9-करप्शन

बीजेपीः ब्लैक मार्केटिंग रोकने केलिए स्पेशल कोर्ट। काला धन लाने के लिए टास्क फोर्स। करप्शन को रोकने के लिए ई-गवर्नेंस पर जोर।

10-रेलवे

बीजेपीः स्वर्णिम चतुर्भुज बुलेट ट्रेन लाई जाएगी।

11-कृषि

बीजेपीः मनरेगा को कृषि से जोड़ा जाएगा। किसानों के लिए कृषि रेल मार्ग बनेगा। फसल उत्पादन के लिए रियल टाइम डेटा। हर खेत को पानी के उद्देश्य के साथ प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना शुरू की जाएगी। नदियों को आपस में जोड़ने की संभावना तलाशी जाएगी।

रविवार, 10 मई 2020

अंध भक्त किसे कहते है

राजनीति में अंधभक्त किसे कहते है?????

जब आप किसी पार्टी के या उस विरोधी पार्टी के किसी नेता के विरोध में सच्चाई लिखें और कुछ उनके समर्थक आके आपके लिखे शब्दो का विरोध करें और तार्किक जवाब ना दे सके और अपने नेता या पार्टी के 5 गलत कामो के बदले 10 सही काम जनहित के ना गिना पाये और आपके कमेंट में बहस से बचते हुए ये कहे कि आप हिन्दू नहीं हो पाकिस्तानी हो...जाति-धर्म की ऊँच नीच का पाठ पढ़ाने लगे तो मैं समझता हूँ कि अंधभक्त उसे ही कहते है....और इस चुनावी दौर में ऐसे अंध भक्त सोशल मीडिया में एक पार्टी विशेष में बहुतायत देखे जा सकते है

मां पर कविता

एक कविता हर माँ के नाम
घुटनों से रेंगते-रेंगते,
कब पैरों पर खड़ी हुआ,
तेरी ममता की छाऊँ में,
जाने कब बड़ा हुआ
काला टीका दूध मलाई,
आज भी सब कुछ वैसा है,
मैं ही मैं हूँ हर जगह,
प्यार ये तेरा कैसा है?
सीधा साधा भोला भाला,
मैं ही सबसे अच्छा हूँ,
कितना भी हो जाऊँ बड़ा,
"माँ" मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ।।।
Happy mother's day......🙏🏻

छोटूराम अथवा यूनियनिस्ट पार्टी

#JaiYoddhey यूनियनिस्ट जैक बनाम भगवा ध्वज ! एक दो खास जानकारी मैं अपने यूनियनिस्ट मिशन के यौद्धेय साथियों के साथ शेयर करना चाहता हूँ ,जिसकी ...