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शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019

[इस देश पर पेहला हक मूलनिवासियों के है

जो लोग पंडित दीनदयाल,हेडगेवार,सावरकर की जयंती-पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया में फूल लेकर खड़े नजर आए तो समझो बस बिकने को आतुर मुर्गा है!

जिंदगी भर हमारे गांव-गवाड़ में दाना चुग्गा,कुकड़-कूँ किया और अंडा संघियों के बाड़े में देने को बांग दे रहा है!

जो लोग गांधी-नेहरू की प्रशंसा की पोथी उठाये घूम रहे है उनको यह समझना चाहिए कि बाप ने लड़ने के लिए जो संघर्ष इन ब्राह्मणवादी मंडली कांग्रेस के सामने किया उसके आगे समर्पण करके अपने आशियाने को आबाद रखने की कोशिश कर रहे है!

कांग्रेस ने देश को आजादी नहीं,अंग्रेजों की रहमत पर देश के लोगों को गुलामी दी और संघियों ने उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए देश के लोगों का पुरुषार्थ बेचने का धंधा आगे बढ़ाया है!

इस देश पर कब्जा चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी हो,शरणार्थियों का ही रहा है!हर देश की सत्ता में उस देश के मूलनिवासी है और संयुक्त राष्ट्र संघ भी यही कहता है कि देश की सत्ता पर पहला हक मूलनिवासीयों का होना चाहिए!

गांधी दक्षिणी अफ्रीका में तो मूलनिवासी लोगों के लिए लड़ता है मगर भारत मे आकर विदेशी शरणार्थियों को सत्ता पर कब्जा करने की मुहिम में लग जाता है और गांधी पूंजीपतियों, पूंजीपति देशों,उनकी धौंस से चलने वाले संयुक्त राष्ट्र का आइकॉन बन जाता है!

इस देश की पहचान व वजूद किसान है,इस देश के शिल्पकार मजदूर है,यह देश किसान कमेरों का है!

कांग्रेस व बीजेपी दो सत्यानाशी के पौधे है और इनके इर्द-गिर्द घूमने वाले लोग इस देश की जनता को इन सत्यानाशी के पौधों का जहर पिलाने वाले है!

जिस तरह का खेल चल रहा है उसके हिसाब से भारत का भविष्य EVM से नहीं सड़कों पर तय होगा!कुछ भी हो इस देश के लिए सड़कों का सुना होना बेहद ख़ौफ़नाक है!

प्रेमाराम सियाग

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

ब्राह्मण कहा से आये

Jalaramhudda

ब्राह्मण विदेशी है प्रमाणज

Jalaram

1. ऋग्वेद में श्लोक 10 में लिखा है कि हम (वैदिक ब्राह्मण ) उत्तर ध्रुव से आये हुए लोग है। जब आर्य व् अनार्यो का युद्ध हुआ ।
2. The Arctic Home At The Vedas बालगंगाधर तिलक (ब्राह्मण) के द्वारा लिखी पुस्तक में मानते है कि हम बाहर आए हुए लोग है ।
3. जवाहर लाल नेहरु ने (बाबर के वंशज फिर कश्मीरी पंडित बने) उनकी किताब Discovery of India में लिखा है कि हम मध्य एशिया से आये हुए लोग है। यह बात कभी भूलना नही चाहिए। ऐसे 30 पत्र इंदिरा जी को लिखे जब वो होस्टल में पढ़ रही थी।
4. वोल्गा टू गंगा में “राहुल सांस्कृतयान” (केदारनाथ के पाण्डेय ब्राहम्ण) ने लिखा है कि हम बाहर से आये हुए लोग है और यह भी बताया की वोल्गा से गंगा तट (भारत) कैसे आए।
5. विनायक सावरकर ने (ब्राम्हण) सहा सोनरी पाने “इस मराठी किताब में लिखा की हम भारत के बाहर से आये लोग है।
6. इक़बाल “काश्मीरी पंडित ” ने भी जिसने “सारे जहा से अच्छा” गीत लिखा था कि हम बाहर से आए हुए लोग है।
7. राजा राम मोहन राय ने इग्लेंड में जाकर अपने भाषणों में बोला था कि आज मै मेरी पितृ भूमि यानि अपने घर वापस आया हूँ।
8. मोहन दास करम चन्द गांधी (वेश्य) ने 1894 में दक्षिणी अफ्रीका के विधान सभा में लिखे एक पत्र के अनुसार हम भारतीय होने के साथ साथ युरोशियन है हमारी नस्ल एक ही है इसलिए अग्रेज शासक से अच्छे बर्ताव की अपेक्षा रखते है।
9. ब्रह्म समाज के नेता सुब चन्द्र सेन ने 1877 में कलकत्ता की एक सभा में कहा था कि अंग्रेजो के आने से हम सदियों से बिछड़े चचेरे भाइयों का (आर्य ब्रह्मण और अंग्रेज ) पुनर्मिलन हुआ है।
इस सन्दर्भ में अमेरिका के Salt lake City स्थित युताहा विश्वविधालय (University of Utaha’ USA) के मानव वंश विभाग के वैज्ञानिक माइकल बमशाद और आंध्र प्रदेश के विश्व विद्यापीठ विशाखा पट्टनम के Anthropology विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा सयुक्त तरीको से 1995 से 2001 तक लगातार 6 साल तक भारत के विविध जाति-धर्मो और विदेशी देश के लोगो के खून पर किये गये DNA के परिक्षण से एक रिपोर्ट तैयार की। जिसमें बता गया कि भारत देश की ब्राह्मण जाति के लोगों का DNA 99:96 %, कश्त्रिय जाति के लोगों का DNA 99.88% और वेश्य-बनिया जाति के लोगो का DNA 99:86% मध्य यूरेशिया के पास जो “काला सागर ’Blac Sea” है। वहां के लोगो से मिलता है। इस रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकालता है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य-बनिया विदेशी लोग है और एस सी, एस टी और ओबीसी में बंटे लोग (कुल 6743 जातियां) और भारत के धर्म परिवर्तित मुसलमान, सिख, बुध, ईसाई आदि धर्मों के लोगों का DNA आपस में मिलता है। जिससे साबित होता है कि एस सी, एस टी, ओबीसी और धर्म परिवर्तित लोग भारत के मूलनिवासी है। इससे यह भी पता चलता है कि एस सी, एस टी, ओबीसी और धर्मपरिवर्तित लोग एक ही वंश के लोग है। एस सी, एस टी, ओबीसी और धर्म परिवर्तित लोगों को आपस में जाति के आधार पर बाँट कर ब्राह्मणों ने सभी मूलनिवासियों पर झूटी धार्मिक गुलामी थोप रखी है। 1900 के शुरुआत से आर्य समाज ब्राह्मण जैसे संगठन बनाने वाले इन लोगो ने 1925 से हिन्दु नामक चोला पहनाकर घुमाते आ रहे है। उक्त बात का विचार हमे बहुत ही गहनता से करने की आवश्यकता है। राष्ट्रिय स्वयं सेवकसंघ के जरिये 3% ब्राह्मण 97% मूलनिवासी भारतीयों पर पिछ्ले कई सालों से राज करते आ रहे हैं।
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शनिवार, 5 अक्टूबर 2019

बाबा टिकैत

बाबा टिकैत...

वो भी समय था जब पश्चिमी उत्तरप्रदेश के गांव सिसौली से कोई ऊंची आवाज में बोल देता तो दिल्ली के लुटियन जॉन में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो जाता!गांव में मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक पूछने आते थे कि "टिकैत बता तेरी इच्छा क्या है?"

दिल्ली का वोट क्लब खचाखच भरता था और पूरी सरकार घुटनों के बल होती थी।आज बाबा टिकैत के वंशजों को दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर ही लाठियों से रोक दिया जाता है,दिल्ली में घुसने तक नहीं दिया जाता है!

अदम गोंडवी का एक शेर है...

भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है!
अहले हिन्दुस्तान अब तलवार के साये में है!!

बाबा टिकैत अंतिम दिनों में व्यवस्था व हालातों से ज्यादा अपने लोगों की दशा व दिशा को लेकर बेहद निराश थे!निराश नेताओं व युवाओं को लेकर थी।आज दृश्य देख लीजिए

अपनी शानो-शौकत में मर्तबा आला रहे
हाथों में फ़ोन व दिमाग मे बलात्कारी बाबा रहे
खेल अब शोहरत पर जा टिका है " प्रेम"
चाहे किसान आत्महत्या का बोलबाला रहे
एक किसान नेता बनने को क्या चाहिए
5-7बेरीढ़ के चमचे,माइक व माला रहे

आज किसान नेता बिकाऊ माल है।बोलियां लगती है खुले बाजार में और किसानों के बच्चे खुश होकर महफ़िल सजाते है कि मेरे वाले की बोली अच्छी लगी है!मेरा वाला बड़ा हो गया,मेरे वाले का कद बढ़ गया है!

यहां अब कदम बढ़ाने की बातें नहीं होती जनाब!अब अपने किसान सेनापति का कद बढ़ाने के लिए भक्तों की सेनाएं तैयार होती है!

न भूली होती जड़ें अपनी
तो खंजर का कोई निशान नहीं होता!
मुद्दे त्याग भक्त बन बैठे
अब मंजर का कोई हिसाब नहीं होता!!

पीछे मुड़कर देखते है तो गर्व होता है कि हमारे पुरखे संघर्ष के सेनापति रहे और उनकी हुंकारों पर हुक्काम डोलते थे,वर्तमान देखे तो उस मोड़ पर खड़े है जहां से न कोई दिशा और न दशा बदलने को कोई साथी खड़ा है!भविष्य सोचकर तो रूह कांप जाती है!

आज बिकाऊ किसान नेताओं ने किसानों को मंडी का सामान समझ लिया है व उनके बच्चों को जयकारा गैंग के सिपाही!

मैँ अदब से सलाम करता हूँ
तो भक्त समझने लगते है!
जब दूरी बनाकर रखता हूँ
नादान समझने लगते है!!

क्योंकि अब निजाम तानाशाह है और किसान नेताओं को यकीन हो चला है कि तानाशाही के महिमामंडन में ही उनकी सुरक्षा है!कोई किसान पुत्र सच को सच कहने लगे तो सबसे पहले बिकाऊ किसान नेताओं की चूलें हिलती है क्योंकि शहंशाह को गुलाम सेनापति पसंद है जो सच को नीचे ही दबाकर रखे!

साभार

प्रेमाराम सियाग

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

ऐतिहासिक व वर्तमान परिवेश में जाट समाज

जब भी मैं जाटों के बारे में लिखता हूँ तो समझा जाना चाहिए कि मैं भारत के वजूद की बात कर रहा हूँ।ज्ञात इतिहास के पन्नों,उजले लम्हों की बात करते है छोटे-छोटे कबीलों व जनपदों का एकीकरण करके चंद्रगुप्त मौर्य मगध साम्राज्य खड़ा करता है।आजादी के आंदोलन की महत्वपूर्ण डोर समझे जाने वाले गांधीजी ने अपना सफर अहिंसा से शुरू किया 1942में “करो या मरो”का नारा देकर हिंसा पर खत्म किया था।चंद्रगुप्त मौर्य ने हिंसा को खत्म करने के लिए हिंसा का रास्ता अख्तियार किया और इस सफर को महान सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध जीतकर अहिंसा पर खत्म किया।

तमाम इतिहासकारों ने सिकंदर को इतना महान घोषित किया कि तत्कालीन समय मे उसके मुकाबले कोई राजा नहीं था मगर झेलम नदी के किनारे जब जाट राजा पौरस के एक वार से ही सिकंदर घोड़ी से गिर पड़ा और उस चोट से ही दुनियां से रुखसत हो गया।



78ईसवी में महान जाट राजा कनिष्क ने शक संवत चलाया जिस आज भारतीय पंचांग के रूप में उपयोग किया जाता है।कनिष्क को भारतीय इतिहाड़कारों ने कोई जगह नहीं दी मगर अफगानिस्तान के स्कूली पाठ्यक्रम में बड़ी शान से पढ़ाया जाता है क्योंकि उन लोगों उपासना पद्धति नई अपनाई है अपने पुरखों को नहीं भूले है।

57बीसी में मालवा में महान जाट राजा विक्रमादित्य हुए जिसने विक्रम संवत चलाया था और यह भारतीय पंचांग का आधार बन गया।उनकी ताकत,न्यायप्रियता व शोहरत ऐसी थी कि उनका नाम एक उपाधि बन गया और बाद के राजा अपने नाम के साथ विक्रमादित्य को उपाधि के रूप में प्रयोग करते थे।

सातवीं सदी में महान जाट राजा हर्षवर्धन हुए जिसे दोगले इतिहासकार इतिहास में उचित जगह देने में नाकाम हो गए थे।वर्तमान अफगानिस्तान के छोटे से इलाके गजनी का एक लुटेरा दूसरे लुटेरों को एकत्रित करता हुआ 1025 में शान से सोमनाथ का मंदिर लूटकर चला गया और सिंध-मुल्तान के जाटों ने उस धन को वापिस लूटा व घायलावस्था में गजनी की मौत हो गई।गजनी का अफगानिस्तान के इतिहास में कहीं कोई जिक्र नहीं है मगर भारतीय इतिहासकारो ने अपने राजाओं की नाकामी व पोंगा-पंथियों के षड्यंत्र को कमतर न बताने के चक्र में महमूद गजनी को महान राजा बनाकर भारतीय जनमानस के सामने पेश कर दिया।

1192 में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की हत्या कर दी थी और तमाम जयचंद तमाशबीन बन गए थे।भले ही उस समय किसी जाट राजा के हाथ मे कोई साम्राज्य न रहा हो मगर रामलाल खोखर के नेतृत्व में कुछ जाट किसान जुटे और 1206ईसवी में गौरी की हत्या करके पृथ्वीराज चौहान की मौत का बदला लिया।

आपस मे सत्ता की लालसा में लड़ रहे स्थानीय राजाओं की फुट की बदौलत एक लुटेरा तैमूर लंग आता है और लूट-खसोट शुरू कर देता है तो जाट हरवीर गुलिया किसानों को एकत्रित करके तैमूर लंग को मौत के घाट उतार देता है।

महाराजा सूरजमल,महाराजा जवाहर सिंह का इतिहास कौन नहीं जानता है!जब रियासतों की अधीनता स्वीकार करने व गुलामी के टैक्स वसूली कार्यकर्ता बनने के लिए मुगल दरबार मे बहन-बेटियों की डोलियां भेजी जा रही थी उस समय एक ब्राह्मण बेटी हरदौली को छुड़ाने के लिए भरतपुर का जाट राजा दिल्ली पर चढ़ाई करता है।महाराजा रणजीत सिंह लाहौर को अपनी राजधानी बनाकर अफगानिस्तान तक राज करते है।अभेद्य कश्मीर को पहली बार जाट हरिसिंह नलवा ही जीतता है।जब देशी राजा भाड़े के कार्यकर्ता बन गए तो बृजमंडल से जाट वीर गोकुला किसानों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ खड़ा होकर लड़ता है।

अपना जीवित कतरा-कतरा मानवता के लिए कुर्बान कर दिया मगर किसी उपासना पद्धति तले आने से इनकार कर दिया।धार्मिक कट्टरता के खिलाफ राजाराम जाट खड़ा होता है और औरंगजेब को आइना दिखाते हुए अकबर का मकबरा खोदकर अस्थियां निकालकर जला डालता है।

इस अमर बलिदानी कौम के बारे में लिखना शुरू करता हूँ तो हर अगली लाइन लिखते हुए एक जाट की महान कुर्बानी कुछ लिखने को मजबूर करती जाती है।1857की क्रांति के बारे में लिखना शुरू करता हूँ तो हर कस्बे से नाहर सिंह तेवतिया जैसे शूरमा मेरी कलम खींचते जाते है तो पटियाला के राजा जाट भूपेंद्रसिंह जैसे रोल्स रॉयस कारों को कूड़ेदान बनाकर अपने स्वाभिमान को अम्बर में रखते नजर आते है।

आजादी के आंदोलन के आईने से चंद कांग्रेसी नेताओं को किनारे कर दें तो हर इलाके से आजाद हिंद फौज के संस्थापक राजा महेंद्र प्रताप आपको नजर आते है तो हर खेत-खलिहान से अंग्रेजों के खिलाफ उठती बगावत की आंधी नजर आती है।

हर कालखंड में जब भी किसी भी राजा ने जनता पर अत्याचार किए तो जाट किसानों ने उसका मुकाबला किया।हर कालखंड में जब देशी राजाओं की आपसी फूट के कारण विदेशी लुटेरों ने वतन पर घात लगाया तो जाटों ने वतन की आबरू की हिफाजत की।जब-जब जरूरत पड़ी तब-तब अप्रशिक्षित किसान सैनिक बने और दो-दो हाथ करने को आगे आये।जब सरकारों को जरूरत पड़ी तो प्रशिक्षित जाट रेजिमेंट के रूप में दुनियाभर में अपने शौर्य की अमर गाथा लिख डाली।चाहे पिछले साल डोकलाम में खड़ा होना हो या अभी पुलवामा अटैक के बाद कश्मीर जाना हो सबसे पहले जाट रेजिमेंट ही पहुंचती है।

आज मेरा इरादा इतिहास लिखना नहीं है बल्कि जाट युवा कुछ भूल गए है उनको कुछ याद दिलाना चाहता हूँ।युवाओं से कहना चाहता हूँ कि अपने पुरखों की जीवनियां पढ़ो,उनके आदर्शों को पढ़ो और अपने जीवन मे ढालो!सियासत के चंद गद्दारों व धर्म के सौदागरों द्वारा हवाओं के साथ बहने की भूल मत करो!तुम इस देश का वजूद हो और तुम्हारे कंधो पर इस वतन की हिफाजत का,अमर तिरंगे को थामकर रखने का भार है।

जिन सीनों ने कभी न पूछा,गोली का अंजाम क्या है!
उसकी औलादें पूछ रही है,मजहब-ए-निजाम क्या है?

कितने बड़े शर्म की बात है!राजा जवाहर सिंह की माँ ने एक उलाहना दिया था कि तेरे बाप की पगड़ी दिल्ली में पड़ी और तूं अपनी पगड़ी सजा रहा है तो जवाहरसिंह ने दिल्ली को उधेड़कर रख दिया था और आज गद्दारों के षड्यंत्र द्वारा सैंकड़ों जाट युवा हरियाणा की जेलों में पड़े है मगर जाट युवा मुँह पर मूच्छों के ताव लगाकर कह रहे है जाट बलवान,जय भगवान!

बच्चों के पापा घर कब आएंगे
पूछ रही तुम्हारी बहन-बेटियां पनघट पर!
तुम भेजने में लगे हो गुंडों को
विधानसभा और संसद की चौखट पर!!

कब सवाल करोगे?कब उठोगे?कब जागोगे?आज मैं तुम्हारा मनोरंजन करने के लिए कुछ नहीं लिखूंगा।मेरी कलम आज मेरा दर्द उगलेगी,समाज का सच उगलेगी जिसे तुम्हे स्वीकार करना ही होगा!

तूफान रुके,लश्कर रुके,
मगर रुकेगी इस कलम की धार नहीं!
मुझे मंजिल का सिरा चाहिए
यह शर्मिदगी भरी मझधार नहीं!!

आज तुम हिन्दू बनकर मंदिर बनाने निकले हो तो मुस्लिम बनकर मस्जिद की जंग लड़ रहे हो!तुम हिन्दू-मुस्लिम की जंग लड़ रहे हो तो तुमसे मेरे कुछ सवाल भी है और कुछ नसीहतें भी!

क्यों नफरत की बू आती है पुरोहित और पुजारी से
क्यों प्रवचनी जहर फैलाते चौक और चौबारों से?
क्यों जिहादी तहरीरें होती मुल्ले और मौलवीयों से
क्यों देश विरोधी नारे गूंजते मस्जिद की दीवारों से??

जाट युवाओं तुम्हारे पुरखों का धर्म प्रकृति रही है,मानवता रही है इंसानियत रही है उनको पढ़ लो!यह धर्म का धंधा तुम्हारे बाप-दादाओं के सिलेबस में नहीं था तुम क्यों इतने उतावले हो रहे हो?हम इस देश का सबसे बड़ा मूलनिवासी समुदाय है।हमने प्रकृति पूजा भी भी देखी,बौद्ध व जैन धर्म भी देखे तो नास्तिक आजीवक सम्प्रदाय भी देखें है।हमने ब्राह्मण धर्म देखा है तो इस्लाम व ईसायत भी देखी है।जब धर्म की जकड़न हमारे ऊपर बढ़ती तो हमारे पुरखे उसके खिलाफ बगावत करते नजर आते है।मगर बड़ा दुःख होता है कि जिसके हाथों में अमर तिरंगा है वो तिरंगा छोड़कर धार्मिक झंडा उठाये घूम रहे है!

मेरे जाट वीरों!घना अंधेरा दिखे
तो मुझे तुम एक महान दहेज दो!
तोड़ दो ये धर्म के बंधन अब तुम
एक बार मेरे भगत को संसद भेज दो!!

अंत मे मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि

जाट युवाओं देख लो,
मेरी व्यथा अब तुम्हारे दरबार मे है!
तुम्हारी लाशों से सरकार बनी
और कातिल अब सरकार में है!!

(

शनिवार, 20 जुलाई 2019

चित्तौडगढ़ किले के निर्माता जाट राजा

ANCIENT JAT HISTORY
चित्तौडगढ़ किले के निर्माता जाट राजा चित्रांग(चित्रांगद) मोर —–मोर ,मोरी ,मयूर ,मौर्य जाट राजवंश –M.S. T
ANCIENT JAT/GETAE HISTORY
1 year ago
#आईये आज हम जानते है मौर जाट राजवंश और चितौड़गढ़ के बारे में!
@Manvendra Singh Tomar जी को धन्यवाद🙏

राजस्थान के चित्तौडग़ढ़ नगर और किले के निर्माता जाट राजा चित्रांग मौर थे जिनको चित्रांगद मोरी भी बोलते थे चित्तौडग़ढ़ की स्थापना चित्रकूट नाम से की गयी कर्नल जेम्स टॉड हो दसरथ शर्मा हो कोई भी इतिहासकार हो सभी इतिहास कार इस बात पर एक मत है की जाट राजा चित्रांग ही चित्तौडग़ढ़ नगर और किले के निर्माता थे उसी राजा ने चित्रंग तालाब का भी निर्माण कराया। ऐसा वर्णन “कुमारपाल प्रबन्ध” पत्र 30-2 में आता है। यह मोर वंश राजपूत जाति में नहीं मिलता है जाटों में इस मोर वंश की आबादी राजस्थान ,पंजाब ,मध्यप्रदेश ,उत्तरप्रदेश महाराष्ट्र में है इसके अतरिक्त मौर जाट पाकिस्तान और जर्मनी में भी बड़ी संख्या में है चित्रांग मौर के छोटे पुत्र के वंशज चितरवाड़ा मौर कहलाते है जिनका निवास मालवा क्षेत्र में है यह लोग नीमच में 14 ग्रामो में निवास करते इनके साथ वहां इनके भाई मोर भी निवास करते है दोनों शाखाओ के नीमच में कुल 30 ग्राम है
सातवीं या आठवीं शताब्दी में परमार अग्नि यज्ञ शुद्धि से राजपूत जाति में शामिल हुए इस पहले परमार /पंवार वंश का अस्तित्व जाटों में मौजूद था परमार वंश से इनको जोड़ना पूर्ण रूप से गलत है क्योकि मौर वंश तो परमारो से पहले ही अस्तित्व में था ऐसे में पिता से पुत्र होता है नाकि पुत्र से पिता इतिहासकारो ने सम्पूर्ण मौर्य वंश को तक्षक नागवंशी जाटों की शाखा लिखा है प्रारम्भ में यह लोग जिस तराई क्षेत्र में बसे वहां मौर पक्षी का निवास अधिक संख्या में होने तथा मौर को अपना प्रिय पक्षी माने के कारन यह मौर कहलाये डॉ hr गुप्ता के अनुसार मौर लोग कोह मौर के निवासी थे जो पेशावर से भी आगे है

ये पोस्ट कितनी सच्ची कितनी झुठी मै नही जानती मगर मै ये जानती हु कि हमारा असली इतिहास बामणो मे छुपाया और हमे गुमराह किया है।

इसलिए ही बामसेफ बार बार कहता है कि जो अपना इतिहास नही जानते वो इतिहास लिख नही सकते।

वो दीनदयाल और गोवलकर के गुणगान करेगे के क्योकि सीधी सी बात ज अपने बाप को नही जानेगे वो दुसरे बाप के ही गुण गाते रहेगे।

भारत के मूलनिवासी लोगो अपना इतिहास खोजो।

शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

जाट किसी पहचान का मोहताज नहीं है अपने आप मे एक पहचान है

वो जाट ही थे जिन्होंने सोमनाथ के मंदिर
का ज्यादातर खजाना वापस लूटकर मंदिर वापस ले
आये थे।
वो जाट रामलाल खोखर ही था जिसने पृथ्वीराज
चौहान के हत्यारे मोहम्मद गौरी को सिन्ध में मार
डाला था।
वो जाट महाराजा रणजीत सिंह ही था जिसने
मुगलों को काबुल, कंधार में जा जाकर पीटा था।
वो जाट वीर गोकुला और माडु जाट ही थे जिन्होंने
औरंगजेब की मरोङ तोङ कर रख दी थी।
वो जाट चूड़ामण ही था जो जोधपुर के महाराज
अजीत सिंह की पुत्री को फरुखसियर पठान से
छुङाकर लाया था।
वो जाट राजा नाहर सिंह ही था जो देश के लिए
1857 में पहले शहीद हुए।
वो जाट महाराजा सूरजमल ही था जिसने घायल
मराठों की मदद की और जिसके जीते
जी किसी दुश्मन की भरतपुर की तरफ आँख उठाने
की हिम्मत ना हुई।
वो जाट राजा जवाहर सिंह ही था जो लाल किले के
किवाङ तक उतार लाया था जो आज भी लोहगढ़ के
किले में चढ़े हैं।
वो जाट करतार सिंह ग्रेवाल
ही था जो छोटी सी उम्र में देश के लिए फाँसी पर
झूल गये।
वो जाट भगत सिंह संधू ही था जिसने देश
को आजादी दिलाई।
वो जाट चौधरी छोटूराम ही था जिसने
किसानों की जमीन की कुर्की बन्द करा दी।
वो जाट चौधरी सेठ छाजूराम ही था जिसने पूरे
हरियाणा में जाट स्कूल और कोलेजों को खङा कर
दिया।
वो जाट ताऊ देवीलाल ही थे जिन्होंने गरीबों और
किसानों की भलाई में साईकिल टैक्स, रेङियो टैक्स
आदि माफ किए और अनेक कानून बनवाए।
अपने सिर से प्रधानमंत्री का ताज वीपी सिंह के
सिर पर रखा।
वो जाट चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत ही थे,
जो राजनीति में ना होते हुए
भी सरकारों को हिला देते थे।
वो जाट मेजर शैतान सिंह, ब्रिगेडियर होशियार
सिंह, कैप्टन सौरभ कालिया ही थे जिन्होंने कई
लङाईयों में देश की आन बचाई।
वो जाट सैनिक ही थे जो 48, 62, 65, 71 और
कारगिल में देश के लिए शहीद हुए।
वो जाट सर सिकन्दर हयात खान चीमा (मुस्लिम
जाट) ही थे जिन्होंने संयुक्त पंजाब में चौधरी सर
छोटूराम के साथ मिलकर गरीबों और
किसानों की भलाई में अनेक कानून बनवाए।
वो जाट जग्गा डाकू ही था जो अमीरों का धन लूट
कर गरीबों में बांट देता था।
वो जाट हरफूल जाट जुलाणी ही था जिसने
अंग्रेजों के राज में गऊ हत्थे तोङे थे।
वो जाट बाबा ज्याणी ही था (कुछ जाटों से
ईर्ष्या करने वालो ने इन्हें ज्याणी चोर
भी लिखा है) जिसने अदली खान की कैद से नार
महकदे को छुङाया था।
वो जाट बाबा शाहमल ही था जो 1857 में
लङा था।
अन्य लाखों करोड़ों जाटों ने धर्म, देश, कौम के लिए
कुर्बानियां दी हैं।
ऐसे मेरे बहादुर पूर्वजों पर मुझे गर्व है।
हमें मुझे #जाट होने पर गर्व है"
JALARAM HUDDA

छोटूराम अथवा यूनियनिस्ट पार्टी

#JaiYoddhey यूनियनिस्ट जैक बनाम भगवा ध्वज ! एक दो खास जानकारी मैं अपने यूनियनिस्ट मिशन के यौद्धेय साथियों के साथ शेयर करना चाहता हूँ ,जिसकी ...